विचारणीय औऱ अनुकरणीय-1

किसी का कहा हुआ “It is never late”यानी किसी भी कार्य को कभी भी शुरू किया जा सकता है ” ये ऐसा वाक्य है जो निष्प्राण में यानी बिल्कुल निराश व्यक्ति में भी किसी कार्य को करने की प्रेरणा फूंक सकता है ,जिस कार्य को वह यह समझता है कि अब वह यह कार्य नहीं कर पायेगा । कभी किसी काम को ये नहीं सोचना चाहिए कि ये मैं नहीं कर पाऊंगा । हमेशा सीखने की दिलचस्पी,नियत और एटीटूड होना चाहिए । जीवन में ‘सतत प्रयास’ का पॉजिटिव विचार और उसका कार्यान्वयन जीवन को बेहतर बनाता है ।
©अश्विनी रमेश ।

किताबें: कविता: दिनेश शर्मा

किताबें

ये हमारे अनुभवों के चेहरें हैं
उपलब्धियों के दर्पण

ज्ञान के सागर की इन लहरों में ही
छुपे हैं पुरखों की हस्तियों के सूरज

हर पन्ने पर उदीप्त यहां
नये दिन की रौशनी

अक्षरों के जुगनुओं ने
संघर्ष की टिमटिमाहट से
उकेरे सुख-दुःख के चित्र

चीटियों से कतारबद्ध शब्दों ने
बनाई जो राहें
चलते उन्हीं पर सधे कदम
पार करते हम
सभ्यता की प्रगति के मील पत्थर

गुंजायमान यहां एक आत्मध्वनि
कि जानो और जियो
जियो और दर्ज करो जीवन।

दिनेश शर्मा
18-04-17

:अंतर : कविता

जय देवता जदराई ,जय देवता चिखड़ेश्वर
इस धरा पर अगर मानवीय संबधों की बात की जाए तो मेरे जीवन में ,मैं जो कुछ भी हूँ उसके लिए मेरी स्वर्गीय पूजनीय मां का योगदान और स्थान सबसे ऊपर है। अतः मां के लिए समर्पित यह कविता जो मेरे काव्य संकलन में प्रकाशित है ,को इस वेबसाइट की पहली रचना के रूप में प्रकाशित कर रहा हूँ :
-अन्तर—-
माँ !
तुम बांध क्योँ नहीं लेती
सत्तू
छाछ
जौ और कुकडी*के
पकवानों की यादों की पोटली
मैं आज गांव छोड़कर
शहर जा रहा हूँ
वह सब देखने
जो मैंने
यहां नहीं देखा
वह सब करने
जो मैंने
यहां नहीं किया
और
वह सब पाने और भोगने
जो यहां नहीं पाया और भोगा
या इससे भी बढकर
शायद अपनी अस्मिता की तलाश में
क्योंकि
आज
मेरी इच्छाएं और विवशताएं
एक होकर
मुझे
यहां से
दूर ले जाना चाहतीं हैं
और
अब तुमसे
बगावत करने के अतिरिक्त
मुझे कोई दूसरा रास्ता
दिखाई ही नहीं देता
यह जानते हुए भी कि
मुझे एक न एक दिन
वापस गांव तो
लोटना ही होगा
लेकिन तब तुम नहीं होगी
और मेरे लिए
गांव या शहर में
तब
केवल थोड़ा सा ही
अन्तर रह जाएगा
शब्दों का
‘गांव’
और
‘शहर’
———–
१.कुकडी*- अर्थ-मक्की !
                                             (प्रस्तुत कविता, मेरे काव्य-संग्रह-“जमीन से जुड़े आदमी का दर्द से उद्धृत की गयी है-अश्विनी रमेश )

 

इस वेबसाइट पर  साहित्यिक लेखकों एवं पाठकों का स्वागत है । किसी भी रचना को प्रकाशन के लिए स्वीकार अथवा अस्वीकार करने का अधिकार वेबसाइट एडमिन का होगा    अश्विनी रमेश, वेबसाइट      एडमिन ।