जमीन से जुडीं यथार्थपरक कविताएँ , शायरी तथा अन्य साहित्यिक विधाएं

:एक में दो व्यक्ति:

:एक में दो व्यक्ति:
एक व्यक्ति में
दो व्यक्ति वास करते हैं
एक अंदर और
एक बाहर
पर दोनों संतुलन
बनाये हुए हैं
जब भीतर का व्यक्ति
उद्वेलित होता है
तो बाहर का व्यक्ति
शांत होता है और जब
बाहर का व्यक्ति
उद्वेलित होता है
तो फिर भीतर का व्यक्ति
शांत होता है
अगर दोनों व्यक्ति
एक हो जाएं तो
या तो स्थिति विस्फोटक
हो सकती है
या फिर बिल्कुल शांत
और ये दोनों स्थितियां
बेहतर कर्मशील
जीवन के लिए
अच्छी नही
इसलिए प्रकृति ने
जो संतुलन बनाया है
यही विचित्र संतुलन
जीवन की गतिशीलता है
जो बेहतर सोच के साथ
जीवन को आगे बढ़ाती है
तभी जीवन ,जीवन है !
©अश्विनी रमेश।

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