जमीन से जुडीं यथार्थपरक कविताएँ , शायरी तथा अन्य साहित्यिक विधाएं

-शोपीस-

– शोपीस-
गरीब और मजबूर
सियासत के प्लेटफार्म पर
दिखाया जाने वाला
सिर्फ एक शोपीस है
एक सिंबल है
जो ये दर्शाता है कि
हमारे रहनुमा
कितने दयालु और खुलेदिल के हैं
जो भरी भीड़ में
एक मजबूर और गरीब को
स्टेज पर खड़ा करके
मदद की खैरात
ऐसे बांटते हैं
जैसे ये लोगो का पैसा नहीं
उनकी मेहरबानी
गरीब और मजबूर पर
बरस रही है
और मौजूदा भीड़ की
तालियां बटोरकर ही तो
नेता महान होते हैं
वर्ना एक गरीब और मजबूर की
मदद तो
भीड़ के सामने स्टेज पर
शोपीस बनाये बिना
और उसके आत्मसम्मान को
ठेस पहुँचाये बिना
भी तो की जा सकती है
©अश्विनी रमेश।

Next Post

Previous Post

Leave a Reply

© 2017 जमीन से जुडीं यथार्थपरक कविताएँ , शायरी तथा अन्य साहित्यिक विधाएं

Theme by Anders Norén