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किताबें: कविता: दिनेश शर्मा

किताबें

ये हमारे अनुभवों के चेहरें हैं
उपलब्धियों के दर्पण

ज्ञान के सागर की इन लहरों में ही
छुपे हैं पुरखों की हस्तियों के सूरज

हर पन्ने पर उदीप्त यहां
नये दिन की रौशनी

अक्षरों के जुगनुओं ने
संघर्ष की टिमटिमाहट से
उकेरे सुख-दुःख के चित्र

चीटियों से कतारबद्ध शब्दों ने
बनाई जो राहें
चलते उन्हीं पर सधे कदम
पार करते हम
सभ्यता की प्रगति के मील पत्थर

गुंजायमान यहां एक आत्मध्वनि
कि जानो और जियो
जियो और दर्ज करो जीवन।

दिनेश शर्मा
18-04-17

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2 Comments

  1. ashwiniramesh April 18, 2017 — Post author

    अक्षरों के जुगनुओं ने
    संघर्ष की टिमटिमाहट से
    उकेरे सुख-दुःख के चित्र

    बहुत खूब । सारगर्भित कविता ।

  2. अश्विनी रमेश April 18, 2017

    अक्षरों के जुगनुओं ने
    संघर्ष की टिमटिमाहट से
    उकेरे सुख-दुःख के चित्र

    बहुत खूब । सारगर्भित कविता ।

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